Education In Hindi Essay Writing

शिक्षा का निजीकरण | Essay on the Privatization of Education in Hindi!

प्राचीनकाल से ही शिक्षा मानव-जीवन का अभिन्न अंग रही है क्योंकि यह मस्तिष्क का संवर्धन कर दक्षता प्राप्ति द्वारा जीवन को संतोषजनक बनाती है ।

फिर भी, ऐसी धारणा है कि शिक्षा का सर्वव्यापीकरण 20वीं शताब्दी में ही संभव हुआ था । आज शिक्षा मानव की मूलभूत आवश्यकता बन गई है । प्रत्येक व्यक्ति में सीखने और अपने आपको शिक्षित करने की ललक होती है और शिक्षा ही उसे आवश्यक ज्ञान द्वारा जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सुसज्जित करती है ।

आज शिक्षा वह नींव है जिस पर आधुनिक समाज के स्तम्भ खड़े हैं । अनौपचारिक एवं सस्ती शिक्षा आज अति विशिष्ट हो गई है । इसका कार्यक्षेत्र भी काफी विस्तृत हो गया है । इसने प्लेटो और अरस्तु के दिनों से लेकर और एक समय में भारत में सम्मानित गुरुकुल परम्परा से लेकर आज तक लम्बी यात्रा तय की है ।

अधिकांश देशों में इसका राष्ट्रीयकरण हो गया है । विज्ञान और प्रौद्योगिकी की शिक्षा देते समय विषय-वस्तु के संगत स्वीकृत सिद्धांतों एवं प्रक्रियाओं को स्वीकार किया जाना चाहिए । लेकिन भारत जैसा विकासशील देश आर्थिक दबाव के कारण शिक्षा पर अधिक व्यय वहन नहीं कर सकता है ।

हमारा शिक्षा पर व्यय हमारे सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) का मात्र 2.8 प्रतिशत है जबकि विकसित देशों में सामान्यत: स्वीकृत मानदंड 6 प्रतिशत या उससे भी अधिक है । इसके फलस्वरुप शिक्षा यहां बड़े प्रचार से वंचित रही है और इसका उत्तर है-शिक्षा का निजीकरण ।

आज देश में शिक्षा के स्तर को उठाने के लिए सरकार के सतत् प्रयासो के फलस्वरूप हमारी लगभग दो-तिहाई आबादी शिक्षित तो हो गई है । लेकिन अभी भी भारत को 21वीं शताब्दी में विश्व के सबसे अधिक अशिक्षित लोगों के देश की उपाधि दी जाती है । सरकार तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या को लेकर शिक्षा कार्यक्रमों को आगे बढ़ा पाने में अपने को असहाय पाती है ।

कोषों की कमी एक गंभीर समस्या है । अत: शिक्षा, खासकर उच्च शिक्षा, के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी की जरूरत है । बहुत पहले ही पश्चिम ने शिक्षा के निजीकरण को प्रेरित किया । हम लोग इसका अनुसरण अब कर रहे है । वर्तमान शिक्षा नीति केवल यही सुनिश्चित करती है कि छात्र नियमित रूप से कक्षा में जाते हैं या नहीं ।

यह छात्रों को सही अर्थ में पढ़ाने या शिक्षित करने की चेष्टा नहीं करती है । कक्षाओं में उपस्थिति से इसके दोनों अभिप्राय और वर्तमान व्यवस्था का अन्त हो जोता है । नियमित उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अनेक योजनाएँ बनाई , जैसे- मध्याह्न की भोजन योजना और विद्यालयों में 7वीं तक के छात्रों को अनुतीर्ण नहीं करना ।

इससे विद्यालय छोड़ने वालों की दर मे कमी आई है । तथापि, शिक्षा की गुणवत्ता में कमी आई है । निजी क्षेत्र इसमें संलग्न हो सकते है । विशिष्ट श्रेणी के पब्लिक स्कूलों में दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता खासकर ईसाई मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों से प्रमाणित हो गई है ।

शिक्षा एक विशेष लक्ष्य है और इस तरह से संस्थानों को उनके समर्पित शिक्षकों और प्रतिभाशाली योग्य छात्रों ने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में स्थान बनाकर प्रतिष्ठित किया है । सरकार की दोषपूर्ण शिक्षा नीति के साथ सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है । निजी विद्यालय बुनियादी सुविधाओं का उचित प्रबंध रखते हैं ।

सरकारी विद्यालयों में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतम विद्यालयों में भवन और पाठ्‌यक्रम के अतिरिक्त सुविधाओं का अभाव होता है और कभी-कभी शिक्षक भी नहीं होते हैं । इन स्कूलों में बर्बादी और भ्रष्टाचार जोरों पर होता है ।

दूसरी तरफ, शिक्षा के निजीकरण से अक्षमता, भ्रष्टाचार शिक्षक, उपकरण, प्रयोगशालाएँ और पुस्तकालयों जैसे मानवीय संसाधनों के अपर्याप्त उपयोग को दूर किया जा सकता है । जो अब हमारी शिक्षा पद्धति के अनिवार्य अंग बन गए है । लेकिन शिक्षा के निजीकरण का नकारात्मक पहलू भी है ।

यह भविष्य में मुनाफे और निहित आर्थिक लाभों को लाती है । श्रेष्ठ स्कूलों में अत्यधिक शुल्क लिया जाता है जो सामान्य भारतीय की सामर्थ्य से बाहर है । ये समर्थ और असमर्थ लोगों के बीच एक खाई उत्पन्न करती है । शिक्षा के निजीकरण ने समाज के उच्च वर्गो के स्वार्थ के लिए अमीरों और गरीबों के बीच विषमता को बढ़ाने का काम किया है ।

निजी क्षेत्र तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने में भी रुचि लेता हुआ जान पड़ता है । इनमें से कुछ संस्थान विभिन्न मदों पर छात्रों से लाखों रुपए लेकर भी उन्हें बुनियादी सुविधाएँ नहीं दे पाते है । यह शिक्षा के निजीकरण के मूल उद्देश्य को मात देता है ।

वैसे भी यदि निजी क्षेत्र प्राथमिक/उच्च विद्यालय शिक्षा में संलग्न है तो उनमें से अधिकांश संस्थानों में मुख्यत: सरकारी निधि या सहायता प्राप्त संस्थानों में अनुदान से प्राप्त धन को अक्सर दूसरे नाम पर खर्च करके स्थिति को बदतर बना दिया जाता है ।

इस तरह के संस्थानों के शिक्षकों को शायद ही कभी पूरा वेतन दिया जाता है जबकि उन्हें सरकारी वर्ग के समान पूर्ण रकम की प्राप्ति की रसीद देनी होती है और उनके कार्यकाल की कोई गारंटी नही होती है । ईसाई मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों को छोड्‌कर शेष निजी स्कूलों के शिक्षकों को अनुबंध के आधार पर रुपए दिए जाते हैं ।

यह कुप्रथा अब निजी इंजीनियरिंग और चिकित्सा संस्थानों में भी फैल गयी है । चूंकि अध्यापन से जुड़े लोगों को बढ़िया भुगतान और उचित देखभाल नही की जाती है, इसलिए दीर्घकाल में इसका खामियाजा शिक्षा को भुगतना पड़ता है । शिक्षा के निजीकरण के गुण और दोष दोनों है । यदि यह नियंत्रित नहीं है तो इसके दोष सम्पूर्ण शिक्षा पद्धति को पंगु बना सकते हैं ।

फिर भी, शिक्षा के परिदृश्य से निजी क्षेत्रों को बाहर रखना संभव नही है क्योंकि सरकारी निधि शिक्षा को सर्वव्यापक बनाने के आदर्श को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है । देश के बहुत-से क्षेत्रों में शिक्षा के लिए अधारभूत सुविधाएँ तक नही हैं । इस प्रकार, निजी क्षेत्र की शिक्षा में संलग्नता आवश्यकता बन गई है ।

शिक्षा में निजी क्षेत्र की भागीदारी में आ रहीं अड़चनों को कम से कम करने की आवश्यकता है । निजी क्षेत्रों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका अदा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए । इसके लिए हमें राज्य और केन्द्र दोनों से स्पष्ट एवं पारदर्शी सरकारी नीति की जरूरत है क्योंकि शिक्षा भारतीय संविधान में समवर्ती सूची के अन्तर्गत आती है ।

इस नीति में सभी दलों को एक समान भूमिका अपनानी होगी । नियंत्रक तंत्र को निष्पक्ष और स्वतंत्र होना चाहिए । विद्यमान नियंत्रक संस्थाएं जैसे-अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (All India Council of Technical Education), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission) इत्यादि को अधिक स्वतंत्र और निश्चित स्वरूप देना आवश्यक है ।

दोषी को सख्त और दण्डित करने के नियम लागू करना आवश्यक है । इस तरह के सभी लाभप्रद तंत्रों द्वारा अपनी स्थिति मजबूत कर लेने के बाद सरकार को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने आपको धीरे- धीरे अलग करना चाहिए और प्राथमिक शिक्षा पर जोर देना चाहिए जहाँ इसकी नीति हल-मुल और दयनीय अवस्था मेँ है ।

यह सरकार को प्राथमिक शिक्षा में अधि क संसाधन निवेश करने का अवसर देगा, इस तरह दीर्घकाल में सारी व्यवस्था लाभान्वित होगी । शिक्षा के क्षेत्र में हमें मिश्रित अर्थव्यवस्था की नीति को अपनाने का समय है जो सरकार द्वारा साठ के दशक से ही अपनाई जा रही है । इस प्रकार की नीति से सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के शैक्षिक संस्थानों में खुशी की लहर दौड़ जाएगी ।

वेदों के अनुसार शैक्षणिक संस्थाएँ एक देवालय के समान है जहाँ शिक्षा की सुगंध फैली होती है । लेकिन आस्मुनिक विश्व में अधिकतर शैक्षिक संस्थाएं व्यावसायिक ‘ दुकानों ‘ में बदल गई है जहाँ शिक्षा ‘ बेची जाती ‘ है । सरकार और निजी संस्थान दोनों शिक्षा के व्यवसायीकरण के लिए समान रूप से जिम्मेदार है ।

जबकि, एक तरफ, शिक्षा के निजीकरण से शिक्षा व्यवस्था में कुछ अनुकूल परिवर्तन आया है, वहीं दूसरी तरफ, इसने गंभीर समस्याओं को भी जन्म दिया है जिनका यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो ये देश की नींव को हिला सकती है ।

शैक्षिक संस्थानों के प्रशासकों के लिए समय आ गया है कि शिक्षा की पवित्रता और महत्ता को महसूस करें और इसका व्यवसायीकरण न करें । यह सरकार की जवाबदेही है कि उचित कानून बनाकर शिक्षा के निजीकरण से उत्पन्न समस्याओं को रोके ताकि देश की नींव को सुरक्षित रखा जा सके ।

नर्सरी, केजी, कक्षा- 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 और 10 में पढ़ने वाले बच्चों और छात्रों के लिए हम यहाँ सरल और आसान भाषा में शिक्षा पर निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। आजकल, शिक्षा पर निबंध, निबंध लिखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण विषय है, जो छात्रों को स्कूल और कॉलेज में, किसी भी कार्यक्रम के आयोजन पर निबंध प्रतियोगिता में दिया जाता है। हमने यहाँ विभिन्न शब्द सीमाओं में कुछ निबंध उपलब्ध कराए हैं, जिनमें से किसी भी निबंध को आप अपनी जरुरत और आवश्यकता के अनुसार चुन सकते हैं:

शिक्षा पर निबंध (एजुकेशन एस्से)

Find essay on education in Hindi language for students in different words limit like 100, 150, 250, 300, 350, and 450 words.

शिक्षा पर निबंध 1 (100 शब्द)

शिक्षा अपने चारों ओर की चीजों को सीखने की एक प्रक्रिया है। यह हमें किसी भी वस्तु या परिस्थिति को आसानी से समझने, किसी भी तरह की समस्या से निपटने और पूरे जीवनभर विभिन्न आयामों में सन्तुलन बनाए रखने में मदद करती है। शिक्षा सभी मनुष्यों का सबसे पहला और सबसे आवश्यक अधिकार है। बिना शिक्षा के हम अधूरे हैं, और हमारा जीवन बेकार है। शिक्षा हमें अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

यह हमारे ज्ञान, कुशलता, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में सुधार करती है। यह हमारे जीवन में दूसरों से बात करने की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाती है। शिक्षा परिपक्वता लाती है और समाज के बदलते परिवेश में रहना सिखाती है। यह सामाजिक विकास, आर्थिक वृद्धि और तकनीकी उन्नति का रास्ता है।

शिक्षा पर निबंध 2 (150 शब्द)

शिक्षा सभी के जीवन में, व्यक्तित्व का निर्माण, ज्ञान और कौशल में सुधार करके, एक सभ्य मनुष्य बनाने में महान भूमिका निभाती है। यह एक व्यक्ति को भले और बुरे के बारे में सोचने की क्षमता प्रदान करती है। हमारे देश में शिक्षा को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है; प्रारम्भिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, और उच्च माध्यमिक शिक्षा। यह चीजों और परिस्थितियों का विश्लेषण करने के लिए हमारे कौशल, चरित्र और पूरे व्यक्तित्व को विकसित करती है। शिक्षा एक व्यक्ति के जीवन में लक्ष्य को निश्चित करने के द्वारा उसके वर्तमान और भविष्य को पोषित करती है। शिक्षा के महत्व और इसकी गुणवत्ता में दिन प्रति दिन सुधार व वृद्धि हो रही है।

हर बच्चें को अपनी उचित आयु में स्कूल अवश्य जाना चाहिए क्योंकि सभी को जन्म से ही शिक्षा प्राप्त करने का समान अधिकार प्राप्त होता है। किसी भी देश का विकास और वृद्धि, इस देश के युवाओं के लिए स्कूल और कॉलेजों में निर्धारित की गयी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। तो भी, देश के प्रत्येक क्षेत्र में, शिक्षा प्रणाली समान नहीं है, इसलिए समाज और लोगों की उचित वृद्धि और विकास नही हो पा रहा है।

शिक्षा पर निबंध 3 (250 शब्द)

पूरे संसार के लोगों के लिए पृथ्वी पर मनुष्य के अस्तित्व और जीवन में सन्तुलन बनाए रखने के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण यंत्र है। यह वो यंत्र है, जो सभी को जीवन में आगे बढ़ने और सफल होने के साथ ही जीवन में चुनौतियों पर विजय प्रदान करने की क्षमता प्रदान करती है। यही केवल और एकमात्र रास्ता है, जो किसी भी विशेष क्षेत्र में आवश्यकता के अनुसार ज्ञान अर्जन (प्राप्ति) और कुशलता में सुधार करती है। यह हमें अपने शरीर, मस्तिष्क और आत्मा में अच्छे सन्तुलन का निर्माण करने में सक्षम बनाती है।

यह हमें पूरे जीवनभर प्रशिक्षित करती है और हमारे रास्ते में अपने भविष्य और बेहतर कैरियर के विकास के लिए आवश्यक संभावनाओं को पाने के लिए बहुत से अवसरों के लाती है। अपनी जीवन-शैली को बढ़ावा देने के साथ ही अपने देश में सामाजिक और आर्थिक वृद्धि का भाग बनने के लिए सभी और प्रत्येक व्यक्ति को उचित शिक्षा की आवश्यकता होती है। किसी भी व्यक्ति या देश का भविष्य, उस देश में शिक्षा प्रणाली में अनुकरण की जाने वाली रणनीतियों पर निर्भर करता है। उचित शिक्षा के बारे में बहुत से जागरुकता अभियानों के बाद भी, देश में अभी भी ऐसे कई गाँव हैं जहाँ रहने वाले लोगों के पास न तो शिक्षा प्राप्ति का कोई उचित संसाधन है और न ही शिक्षा के बारे में कोई जागरुकता ही है।

यद्यपि, पहले से कहीं अधिक अब परिस्थितियों में सुधार है और सरकार द्वारा देश में शिक्षा के स्तर में सुधार करने के लिए बहुत से कदम उठाए गए हैं। एक समाज की भलाई, उस समाज में रहने वाले लोगों की शिक्षा पर निर्भर करती है। उचित शैक्षणिक स्तर पूरे देश में समस्यात्मक मुद्दों को सुधार कर आर्थिक और सामाजिक समृद्धि लाता है।


 

शिक्षा पर निबंध 4 (300 शब्द)

जीवन में सफलता, सम्मान और पहचान प्राप्त करने के लिए, शिक्षा सभी के लिए आवश्यक यंत्र है। शिक्षा सभी के जीवन में महान भूमिका निभाती है क्योंकि यह मनुष्य के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव लाती है। यह निश्चिन्तता प्राप्त करने और परिस्थितियों का समाना करने के लिए सकारात्मक और नकारात्मक दोनों आयामों पर सोचने की क्षमता प्रदान करती है। यह अपने ज्ञान को बढ़ाने और संसार का स्पष्ट दृष्टिकोण रखने के कौशल को विस्तृत करने के लिए सबसे आसान रास्ता है। यह हम में, हमारे जीवन के रास्ते में आगे बढ़ने के लिए रुचि पैदा करती है और इस प्रकार, देश में वृद्धि एवं विकास होता है। हम टीवी देखने, किताब पढ़ने और अन्य साधनों से शिक्षित होकर सीख सकते हैं।

उचित शिक्षा हमारे कैरियर के लक्ष्य को पहचानने में और सभ्य तरीके से रहना सीखृने में मदद करती है। हम बिना शिक्षा के जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते क्योंकि बिना इसके, हम स्वस्थ माहौल और उन्नत समुदाय का निर्माण नहीं कर सकते। जीवन में सब कुछ लोगों के ज्ञान और कौशल पर आधारित है, जो शिक्षा के द्वारा अपने आप से आता है। व्यक्ति, समाज, समुदाय और देश का उज्ज्वल भविष्य, शिक्षा प्रणाली द्वारा अनुकरण करने की जाने वाली रणनीति पर निर्भर करता है। जीवन में अधिक तकनीकी उन्नति की बढ़ती हुई माँग ने गुणात्मक शिक्षा के क्षेत्र को बढ़ाया है।

यह वैज्ञानिकों की शोध कार्यों में, यंत्रों मशीनों या आधुनिक जीवन के लिए आवश्यक अन्य तकनीकियों के अविष्कार में सहायता करती है। लोग अपने जीवन में शिक्षा के महत्व और क्षेत्र के बारे में जागरुक हो रहे हैं और लाभान्वित होने की कोशिश कर रहे हैं। फिर भी, देश के पिछड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोग जीवन में आधारभूत आवश्यकताओं की कमी के कारण अभी भी उचित शिक्षा प्राप्त नही कर पा रहे हैं। वे आज भी अपने दैनिक जीवन की आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हमें पूरे देश में बेहतर वृद्धि और विकास के लिए प्रत्येक क्षेत्र में समान रुप से शिक्षा के बारे में जागरुकता लाने की आवश्यकता है।

शिक्षा पर निबंध 5 (350 शब्द)

सभी के जीवन की बेहतरी के लिए शिक्षा बहुत आवश्यक है और इस तरह, हम सभी को अपने जीवन में शिक्षा के महत्व को समझना चाहिए। यह हमें सक्षम बनाती है और जीवन के सभी पहलुओं के लिए तैयार करती है। देश के अविकसित क्षेत्रों में सरकार द्वारा बहुत से शैक्षिक जागरुकता अभियान चलाने के बाद भी, वहाँ शिक्षा प्रणाली अभी भी कमजोर है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग बहुत गरीब हैं और अपना पूरा दिन केवल कुछ आधारभूत जरुरतों को पूरा करने में व्यतीत कर देते हैं। इसलिए देश के सभी कोनों में उचित शिक्षा प्रणाली की संभावनाओं को बनाने के लिए सभी के व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है।

देश में शिक्षा प्रणाली के स्तर को बढ़ावा देने के लिए सभी की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है। स्कूल और कॉलेज प्राधिकरणों को अपने छात्रों में शिक्षा के लिए रुचि और जिज्ञासा को बढ़ावा देने के लिए, शिक्षा के लिए कुछ मुख्य उद्देश्यों को निर्धारित करना होगा। शुल्क (फीस) संरचना पर भी व्यापक स्तर पर चर्चा करनी चाहिए क्योंकि अधिक शुल्क के कारण बहुत से विद्यार्थी अपनी शिक्षा को जारी रखने में सक्षम नहीं होते जो लोगों को जीवन के हरेक पहलु में असमानता की ओर ले जाती है। शिक्षा मनुष्य का सबसे पहला और अनिवार्य अधिकार है इसलिए सभी को शिक्षा में समानता मिलनी चाहिए।

हमें लोगों के बीच में समानता के साथ ही पूरे देश में समान वैयक्तिक विकास लाने के लिए, हमें सभी के लिए शिक्षा की सुविधा में सन्तुलन बनाना होगा। शिक्षा समाज में सभी को अपने चारों ओर की वस्तुओं में हस्तक्षेप करके सकारात्मक रुप में बदलने में मदद करती है। यह हमें हमारे शरीर, मस्तिष्क और अन्तर्मन में सन्तुलन बनाए रखने के साथ ही शिक्षा की तकनीकी में आवश्यक उन्नति को भी बढ़ावा देती है। यह देशों के वृद्धि और विकास के लिए समाज में प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देती है। यह समाज में सामान्य संस्कृति और मूल्यों को विकसित करने के द्वारा सभी को सामाजिक और आर्थिक दोनों रुपों से सक्षम बनाती है। इस प्रकार, स्पष्ट है कि, शिक्षा और इसके महत्व से समाज का कोई भी पहलु अछूता नहीं है। यह प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


 

शिक्षा पर निबंध 6 (450 शब्द)

शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण तंत्र है, जो व्यक्ति के जीवन के साथ ही देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आजकल, यह किसी भी समाज की नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बन गयी है। शिक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए, सरकार के द्वारा 5 साल से 15 साल तक की आयु वाले सभी बच्चों के लिए शिक्षा को अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षा सभी के जीवन को सकारात्मक तरीके से प्रभावित करती है और हमें जीवन की सभी छोटी और बड़ी समस्याओं का समाना करना सिखाती है। समाज में सभी के लिए शिक्षा की ओर इतने बड़े स्तर पर जागरुक करने के बाद भी, देश के विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा का प्रतिशत अभी भी समान है।

पिछड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अच्छी शिक्षा के उचित लाभ प्राप्त नहीं हो रहे हैं क्योंकि उनके पास धन और अन्य साधनों की कमी है। यद्यपि, इन क्षेत्रों में इस समस्या को सुलझाने के लिए सरकार द्वारा कुछ नई और प्रभावी रणनीतियों की योजना बनाकर लागू किया गया है। शिक्षा ने मानसिक स्थिति को सुधारा है और लोगों के सोचने के तरीके को बदला है। यह आगे बढ़ने और सफलता और अनुभव प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास लाती है और सोच को कार्य रुप में बदलती है।

बिना शिक्षा के जीवन लक्ष्य रहित और कठिन हो जाता है। इसलिए हमें शिक्षा के महत्व और दैनिक जीवन में इसकी आवश्यकता को समझना चाहिए। हमें पिछड़े क्षेत्रों में लोगों को शिक्षा के महत्व को बताकर, इसे प्रोत्साहन देना चाहिए। विकलांग और गरीब व्यक्तियों को भी अमीर और सामान्य व्यक्तियों की तरह वैश्विक विकास प्राप्त करने के लिए, शिक्षा की समान आवश्यकता है और उन्हें समान अधिकार भी प्राप्त है। हम में से सभी को उच्च स्तर पर शिक्षित होने के लिए अपने सबसे अच्छे प्रयासों को करने के साथ ही सभी की शिक्षा तक पहुँच को संभव बनाना चाहिए जिसमें सभी गरीब और विकलांग व्यक्ति वैश्विक आधार पर भाग ले सकें।

कुछ लोग ज्ञान और कौशल की कमी के कारण पूरी तरह से अशिक्षित रहकर बहुत दर्दनाक जीवन जीते हैं। कुछ लोग शिक्षित होते हैं लेकिन पिछड़े इलाकों में उचित शिक्षा प्रणाली के अभाव के कारण अपने दैनिक कार्यों के लिए धन जोड़ने में भी पर्याप्त कुशल नहीं होते। इस प्रकार, हमें सभी के लिए अच्छी शिक्षा प्रणाली को प्राप्त करने के समान अवसर देने की कोशिश करनी चाहिए, चाहे वो गरीब हो या अमीर। एक देश, नागरिकों के वैयक्तिक विकास और वृद्धि के बिना विकसित नही हो सकता। इस प्रकार, एक देश का व्यापक विकास उस में देश में नागरिकों के लिए उपलब्ध प्रचलित शिक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। देश में हर क्षेत्र में नागरिकों के लिए अच्छी और उचित शिक्षा प्रणाली को उपलब्ध कराए जाने के सामान्य लक्ष्य को निर्धारित किया जाना चाहिए और शिक्षा प्राप्ति के रास्ते को सुगम व सुलभ्य बनाए जाने की कोशिश की जानी चाहिए। इस तरह देश अपने चहुँमुखी विकास की ओर अग्रसर होगा।


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